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मुजफ्फरपुर :: खादी में नजर आएंगे एलएस कॉलेज के छात्र और शिक्षक
October 8, 2019 • aaditya prakash srivastava

विजय कुमार शर्मा, कुशीनगर केसरी, बिहार, मुजफ्फरपुर। जिस कॉलेज में बापू ने रखा कदम वहां के छात्र शिक्षक और कर्मचारी के लिए ड्रेस कोड होगा खादी वस्त्र। एलएस कॉलेज कर रहा विचार बापू के जीवन-मूल्यों को अपने अंदर उतारने का संकल्प। महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान जिस लंगट सिंह महाविद्यालय में कदम रखा, वहां खादी वस्त्र अब ड्रेस कोड में शामिल होगा। जल्द ही छात्र, शिक्षक व कर्मचारी खादी वस्त्र धारण करेंगे। मकसद है कि गांधी को इस कैंपस के कण-कण में शिद्दत से महसूस किया जाए। प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसपर विचार-विमर्श हुआ। प्राचार्य ने कहा कि खादी वस्त्र ही नहीं, विचार भी है। इसे धारण करने से हमारी भावना गांधी-विचार से ओतप्रोत होगी। खादी पहनने में भी आरामदायक व त्वचा के लिए फायदेमंद होता है।

गौरतलब है कि इसी कॉलेज कैंपस में गांधी कूप बापू की याद दिलाता है। 11 अप्रैल, 1917 की सुबह जब गांधीजी इस कैंपस में कदम रखे थे, तब उन्होंने कला ब्लॉक के समीप बने कूप पर स्नान किया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस कूप पर स्नान करते बापू की प्रतिमा का पिछले वर्ष ही अनावरण किया। इस कूप को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने व गांधी स्मृति संग्रहालय के रूप में विकसित करने की मांग होती रही है। प्राचार्य के साथ बैठक में डॉ. एसके मुकुल, डॉ. एसआर चतुर्वेदी, डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. ललित किशोर मौजूद थे। शिक्षकों ने खादी से जुडऩे का संकल्प लिया। डॉ. अवधेश कुमार व डॉ. एसआर चतुर्वेदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में खादी का बहुत महत्व रहा है। गांधीजी ने गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खादी के प्रचार-प्रसार पर बहुत जोर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समारोह में खादी को बढ़ावा देने के लिए नारा दिया था-'खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन।Ó खादी वस्त्र की मांग और उत्पादन बढऩे से बेरोजगारी भी दूर होगी। खादी उद्योग से जुड़े श्रमिकों के जीविकोपार्जन के लिए इस वस्त्र का अधिक इस्तेमाल फायदेमंद होगा।

प्राचार्य का मानना है कि बापू को सिर्फ दिवस विशेष भर याद कर लेने से उनकी प्रासंगिकता सिद्ध नहीं होती। उन्हें प्रति दिन स्मरण करना चाहिए। उनके बताए मार्ग पर चलकर उनके जीवन-दर्शन को अपने अंदर उतारने की कोशिश करनी चाहिए। कॉलेज कैंपस को नशामुक्त बनाया जाएगा। गांधी दर्शन पर संगोष्ठी एवं कार्यशाला वर्षभर आयोजित होगी। गांधी दर्शन और उनके सामाजिक कार्यक्रमों पर बीएमसी विभाग डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाएगा। गांधी म्यूजियम का निर्माण करने पर विचार हो रहा है। गांधी कूप के पास मनोरम पार्क जल्द ही बनने वाला है। इसपर डेढ़ करोड़ की लागत आएगी। इस पार्क में रंग-बिरंगी लाइटों पर फाउंटेन का नजारा भी देखने को मिलेगा।