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लखनऊ :: सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या मामले में मंदिर निर्माण का सुनाया फैसला, आइए जानें क्या हैं निर्णय
November 9, 2019 • aaditya prakash srivastava • देश

सुनील कुमार तिवारी/शम्भू मिश्र, कुशीनगर केसरी, लखनऊ। रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनाया फैसला। इससे पहले, संविधान पीठ ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान में बराबर-बराबर बांटने के हाईकोर्ट के सितंबर, 2010 के निर्णय के खिलाफ दायर अपीलों पर 40 दिन तक सभी पक्षों की दलीलें सुनी।अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन रामलला की है। न्यायालय ने अयोध्या में 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम लला को दी। कोर्ट ने मंदिर निर्माण का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट बनाकर सरकार की ओर से मंदिर निर्माण करवाया जाए। इसके लिए तीन महीने में योजना तैयार की जाए। साथ ही कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए कहीं और पांच एकड़ जमीन दे दी जाए। विवादित 2.77 एकड़ जमीन का कब्जा केंद्र सरकार के रिसीवर के पास बना रहेगा।
कुछ वकीलों ने उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश की अदालत के बाहर 'जय श्री राम' के नारे लगाए। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय के फैसला का स्वागत करते हैं, जिससे दशकों पुराने विवाद का अंत हुआ। मैं शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील करता हूं।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ा। गोगोई ने बताया कि कोर्ट ने 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले के खिलाफ शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल स्पेशल लीव पेटिशन को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के साक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।
कोर्ट ने कहा, एएसआई यह नहीं बता पाया कि क्या मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था।कोर्ट ने बाबरी विध्वंस पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ था। कोर्ट ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी। विवादित स्थल के एक नीचे एक ढांचा था। दबा हुए स्ट्रक्चर कोई इस्लामिक ढांचा नहीं था।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगाई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने विवादित ढांचे पर अपना दावा करने की शिया वक्फ बोर्ड की अपील सर्वसम्मति से खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार यह सरकारी जमीन है। उच्चतम न्यायालय ने निर्मोही अखाड़ा राम लला की मूर्ति का उपासक या अनुयायी नहीं है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निर्मोही अखाड़े का दावा कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंधित है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि सरकार को ट्रस्ट निर्माण में निर्मोही अखाड़े को कोई भूमिका देनी चाहिए।