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गोरखपुर :: कूड़े के ढेर में निराश्रित पशुओं को सूबे के मुखिया के गृह शहर में कूड़ा फेंकने स्थान पर लेना पड़ रहा है आश्रय और निवाला
December 8, 2019 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार आवारा पशुओं आश्रय देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर निराश्रित पशु आश्रय केंद्र बनाकर पूरे प्रदेश में निराश्रित पशुओं को आश्रय देने का कार्य कर रही है लेकिन सुबे के मुखिया के गृह शहर में उनके निवास से महज एक किलोमीटर दूरी पर हींं कूड़ा फेंकने स्थान पर कूड़े के ढेर में निराश्रित पशुओं को आश्रय लेना पड़ रहा है और उसी कुड़े के ढेर से निवाला भी निकलना पड़ रहा है। यह वाकया तो "दिया तले अंधेरा" कहावत को चरितार्थ करता नजर आ रहा है।बताते चलें कि हिंदुत्व में अपने आप को पूरी तरह से रामाने वाले उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ एक संत की गरिमा को चरितार्थ करते हैं। ऐसा उन्होंने अपने मुख्यमंत्री काल में कुछ कार्य भी प्रारंभ करने में आगे कदम भी बढ़ाया है। जिसमें एक सबसे बड़ा कार्य निराश्रित पशुओं को आश्रय देने का कार्य है। इसके लिए करड़ों रुपये शासन स्तर से धन मुहैया कराकर निराश्रित पशुओं का आश्रय की बनवाने का कार्य योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया लेकिन यह विडंबना है की स्वयं सूबे के मुखिया के गृह नगर में उनके निवास से महज एक किलोमीटर दूरी पर हींं कूड़ा फेंकने स्थान पर कूड़े के ढेर में निराश्रित पशुओं को आश्रय लेना पड़ रहा है और उसी कुड़े के ढेर से निवाला भी निकलना पड़ रहा है। यह कहीं ना कहीं व्यवस्था और सिस्टम को धता बता रही है और "दिया तले अंधेरा" कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही है।