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छपरा :: अब सामान्य बच्चों की तरह जिन्दगी की दौड़ लगायेगी प्रीति, आरबीएसके के तहत 5 वर्षीय प्रीति के क्लब फूट का हुआ सफल ऑपरेशन
January 13, 2020 • aaditya prakash srivastava • सामान्य

• एनएमसीएच में हुआ नि:शुल्क ऑपरेशन • जन्म से ही पैर से दिव्यांग थी बच्ची • आरबीएसके की टीम ने बच्ची को किया चिन्हित।विजय कुमार शर्मा, बिहार, छपरा। जन्मजात क्लब फुट से ग्रसित 5 वर्षीय मासूम प्रीति कुमारी अब सामान्य बच्चों की तरह दौड़ भाग सकेगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके ) के तहत उसके दांए पैर का एनएमसीएच पटना में निशुल्क ऑपरेशन हुआ, जो सफल रहा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। आरबीएसके की टीम गांव-गांव व स्कूलों पर पहुंचकर बच्चों की स्क्रिनिंग करती है। इसी दौरान सारण जिले के मशरक प्रखंड के गोपालबाड़ी आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 136 पर आरबीएसके के मोबाईल टीम-2 ने इस बच्ची को चिन्हित कर इलाज के लिए डीआईसी वार्ड छपरा रेफर किया था। जहां पर प्राथमिक उपचार के बाद उसे एनएमसीएच पटना रेफर कर दिया गया। जहां पर उसके पैर का नि:शुल्क ऑपरेशन किया गया। आरबीएसके मोबाईल टीम-2 के डॉ. मनोरंजन कुमार सिंह व एएनएम प्रतिमा कुमारी के द्वारा बच्ची को चिन्हित कर डीआईसी सेंटर में रेफर किया गया था। जहां उसके पटना एनएमसीएच रेफर किया गया और उसका नि:शुल्क सफल ऑपरेशन कराया गया।
मशरक प्रखंड के गोपालबाड़ी निवासी नागेंद्र प्रसाद ने बताया कि मेरी बच्ची को जन्मजात बीमारी क्लब फुट होने से उसका दायां पैर उल्टा था। पैर का पंजा एल शेप में मुड़ा हुआ था। शहर के कई डाक्टरों को दिखाया और हजारों रुपये खर्च कर दिए। डाक्टरों ने ऑपरेशन की बात कहकर लंबा खर्चा बता दिया। आर्थिक स्थिति ठीक न होने से बेटी को दिव्यांग समझ उसकी देखरेख में लग गए। लेकिन आरबीएसके के द्वारा मेरी बच्ची को एक जीवन मिला है। अब मेरी बिटिया सामान्य बच्चों की तरह दौड़ सकेगी।
आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत बच्चों में 38 तरह की बीमारियों की जांच कर उसका समुचित इलाज किया जाता है। इन सभी बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटकर इसे 4 डी का नाम दिया गया है। जिन तीस बीमारियों का इलाज किया जायेगा, उसमें दांत सड़ना, हकलापन, बहरापन, किसी अंग में सून्नापन, गूंगापन, चर्म रोग, नाक रोग त्वचा की बीमारी (खुजली, फफूदीय संक्रमण एवं एक्जिमा),मध्यकर्णशोथ, आमवाती हृदयरोग, प्रतिक्रियाशील हवा से होने वाली बीमारियां, दंत क्षय, ऐंठन विकार, न्यूरल ट्यूब की खराबी, डाउनसिंड्रोम, फटा होठ एवं तालू/सिर्फ़ फटा तालू, मुद्गरपाद (अंदर की ओर मुड़ी हुई पैर की अंगुलियां), असामान्य आकार का कुल्हा, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदयरोग, असामयिक दृष्टिपटल विकार आदि शामिल है।