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छपरा :: अब नहीं करना पड़ता है गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों के चौकठ पर इंतजार, ट्रायज रूम में तुरंत मिलता है दाखिला
January 15, 2020 • aaditya prakash srivastava • सामान्य

• सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में बना ट्रायज रूम • ट्रायज रूम में जांच के बाद लेबर रूम या ओटी में भर्ती • तीन स्तर पर की जाती है जांच।
विजय कुमार शर्मा बिहार, छपरा। अब सरकारी अस्पतालों के चौकठ पर गर्भवती महिलाओं को घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता है। उन्हें तुरंत ट्रायज रूम में दाखिला मिल जाता है। अब अस्पताल में भर्ती होने के बाद प्रसूताओं को पहले ट्रायज रूम में रखा जाता है। जांच के बाद ही उन्हें लेबर रूम या फिर ऑपरेशन थियेटर में लाया जाता है। पहले गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सीधे अस्पताल के लेबर रूम में लाया जाता था, लेकिन अब उन्हें लेबर रूम में आने से पूर्व ट्रायज रूम रखा जाता है। पहले गर्भवती महिलाओं को अस्पताल के बाहर इंतजार करना पड़ता था या फिर उन्हे सीधे लेबर रूम में हीं भर्ती करा दिया जाता था। लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए सुविधाओं में बढोतरी करते हुए जिले के सदर अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम में ट्रायज रूम का निर्माण कराया गया है।अस्पतालों के लेबर रूम में प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती को अब ट्रायज कॉर्नर बच्चे के जन्म का समय बताएगा। इससे लेबर रूम में उमड़ने वाली भीड़ कम हो सकेगी। गर्भवती इस कॉर्नर में हेल्थ चेकअप कराकर बच्चा जन्म होने का समय जान सकेंगी। इस दौरान गर्भवती की प्रसव पूर्व होने वाली सभी चेकअप भी हो रही है। चेकअप के दौरान डॉक्टर गर्भवती की स्थिति देख कर बच्चे के जन्म का समय बता रही हैं। इससे प्रसव के दौरान होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं में कमी आ रही है।
ट्रायज रूम में गर्भवती महिलाओं की तीन स्तर पर जांच कर जटिलता की पहचान की जाती है। पहला नर्मल, दूसरा सेमी- नर्मल, तीसरा सिरियस स्थिती में। इन तीन स्तरों पर गर्भवती महिला की जांच की जाती है। वहां पर विशेषज्ञ चिकित्सकों व एएनएम के द्वारा महिलाओं को देखा जात है कि प्रसव कराने में समय है या नहीं। अगर प्रसव होने पर कुछ दिन शेष है तो उन्हें घर भेजा जाता है । अगर समय नहीं है तो गर्भवती को सीधे लेबर रूम में प्रसव कराने के लिए भेजा जाता है। यदि चिकित्सक या एएनएम को लगता है कि प्रसव साधारण नहीं हो सकता तो गर्भवती को आपरेशन थियेटर में भेजा जाता है। ट्रायज कार्नर में बीपी, पल्स, एफएचएस (शिशु के दिल की धड़कन), तापमान, पेट की जांच, पीओसीटी किट से हीमोग्लोबिन, यूरिन, प्रोटीन, शुगर, एचआईबी आदि की जांच कर केस सीट भरी जाती है। यह जांच गर्भवती की स्थिति बताती है।

केयर इंडिया बीएम अमितेश कुमार ने बताया अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत यह ट्रायज कॉर्नर खोला गया है। जिससे गर्भवती महिलाओं को काफी सहूलियत हो रही है। अब पहले के तरह लेबर रूम में भीड़ की स्थिति नहीं बनती है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को भी काम करने में आसानी होती है। सिविल सर्जन डॉ. मधेश्वर झा ने बताया जिले के सभी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभाग कृत-संकल्पित है। लगातार अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बढ़ोतरी की जा रही है। ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा जा सके। अब अस्पतालों में ट्रायज रूम बनाया गया है। जिससे गर्भवती महिलाओं को काफी आसानी हो रही है।