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बेतिया(प.चं.) :: सीमांत गांधी खान व अब्दुल गफ्फार खान की 32 वीं पुण्यतिथि पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
January 20, 2020 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

शहाबुद्दीन अहमद, बेतिया(प.चं.), बिहार। महात्मा गांधी के सच्चे मित्र महान स्वतंत्रता सेनानी भारत रत्न सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान उर्फ बादशाह खान की 32 वी पुण्यतिथि पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि ! आज दिनांक 20 जनवरी 2020 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सच्चे मित्र ,भारत रत्न सीमांत गांधी, खान अब्दुल गफ्फार खान उर्फ बादशाह खान की 32 वी पुण्यतिथि पर सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया! जिसमें विभिन्न गांधीवादी चिंतको, गांधीवादी विचारक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया! इस अवसर पर सर्वप्रथम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान को श्रद्धांजलि अर्पित की गई एवं उनके जीवन दर्शन पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया।इस अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर सह सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद (अधिवक्ता) ने कहा कि आज ही के दिन आज से 32 वर्ष पूर्व 20 जनवरी 1988 ई0 को महान स्वतंत्रता सेनानी सीमांत गांधी भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खान का निधन हुआ था! उनके वसीयत के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार पाकिस्तान अफगानिस्तान सीमा के निकट उनके पुश्तैनी गांव जलालाबाद में हुआ था! भले ही आज खान अब्दुल गफ्फार खान उर्फ बादशाह खान अफगानिस्तान के जलालाबाद में दफन हो लेकिन उनकी आत्मा हमेशा ही भारत में रही! देश की स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र को अंग्रेजों के अत्याचार से आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई! राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदेश पर उन्होंने पेशावर में मानव सेवा करने का निर्णय लिया! राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी 150 वी जन्म शताब्दी पर हमें पुन: भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खान की 32 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण करने का अवसर प्राप्त हो रहा है !1969 ई0 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी 100वी जन्म शताब्दी पर भारत सरकार की ओर से विशेष अतिथि के रूप में महान स्वतंत्रता सेनानी सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान को भारत सरकार द्वारा आमंत्रित किया गया था !खुद भारत सरकार की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हवाई अड्डे पर हाड मास के उस व्यक्ति का स्वागत किया था भावुकता इतनी थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एवं जयप्रकाश नारायण के आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे पुरानी यादें ताजा हो गई थी ! जिसने भारत को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी !लगभग 2 वर्षों तक सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान भारत के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा सुरक्षा कारणों के दरकिनार कर के किया! इसी सिलसिले में बिहार के मुजफ्फरपुर में रमजान के महीने में कुछ छात्र उनसे मिलने आए एवं सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान से छात्र बात करना चाहते थे! खान अब्दुल गफ्फार खान ने कहा कि जब मैं 30 -32 साल पहले महात्मा गांधी के साथ बिहार आता था तो आसानी से यहां की भाषा में समझ जाता था लेकिन आज की भाषा बदली है !मुजफ्फरपुर के लोगों ने बताया कि वह भाषा भोजपुरी थी और आज की भाषा आकाशवाणी एवं समाचार पत्र की भाषा है! इस पर खान अब्दुल गफ्फार खान ने कहा कि अपनी मातृभाषा को जीवित रखो ताकि आप की संस्कृति जीवित रहे! इस अवसर पर बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के डॉ0 शाहनवाज अली एवं स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर डॉ नीरज गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार ने 1987 में सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान बादशाह खान को भारत रत्न से नवाजा! स्मरण रहे कि लगभग 98 वर्ष की अपनी आयु में सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान लगभग 35 वर्षों में भारत और पाकिस्तान के जेल में रहे! खान अब्दुल गफ्फार खान भारत रत्न पाने वाले पाकिस्तान के पहले एवं अब तक के आखिरी नागरिक हैं! जिन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से नवाजा गया है! इस अवसर पर वक्ताओं ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि बेतिया नगर भवन में लगे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान के तेल चित्र जो काफी खस्ता हालत में है! अविलंब सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन जिला प्रशासन से अनुरोध करती है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जन्म शताब्दी पर महात्मा गांधी एवं खान अब्दुल गफ्फार खान की तेल चित्र को पुनः स्थापित की जाए ताकि आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास को जान सके! सरकार द्वारा यही होगी सच्ची श्रद्धांजलि!