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बेतिया(प.चं.) :: सरकार की कूटनीति का शिकार हैं शिक्षक : डा. अंजना
October 20, 2019 • aaditya prakash srivastava

शहाबुद्दीन अहमद, कुशीनगर केसरी, बेतिया। वर्तमान सरकार की कूटनीति का शिकार हमारे वे शिक्षक हैं जिन्होंने 35 से 40 वर्षों से एक अच्छे दिन की प्रतीक्षा में जब अपने घर वालों के समक्ष शिक्षक होने का सिद्ध कर सकें की प्रतीक्षा में सेवानिवृत्त हो रहे हैं अथवा होने वाले हैं।

उक्त बातें सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की संभावित प्रत्याशी डॉ अंजना सिंह ने कहीं वो रविवार को स्टेशन चौक स्थित एक निजी होटल में प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहां की सरकार ने देखा कि वित्त रहित शिक्षक ससमय अनुदान दिए जाने के साथ साथ वेतनमान की मांग करने लगे हैं और शिक्षक निर्वाचन के विधान परिषद का निर्वाचन करीब है, तो सीधे 626 विद्यालयों एवं महा विद्यालयों की मान्यता को 2003/04 की भांति रद्द करने की घोषणा कर दी। अब हमारी वित्त रहित शिक्षक जहां ससमय अनुदान दिए जाने तथा वेतनमान की मांग कर रहे थे उसे बंद कर सभी अपने अस्तित्व की लड़ाई में लग गए । 626 महाविद्यालय की मान्यता बहाली करवाना उनकी पहली मांग बन गई है। फिर भी धन्यवाद है की एक ही पखवारे में 626 शिक्षण संस्थानों की मान्यता रद्द करने की सूचना मिली थी उन सभी संस्थानों में अनुदान की बकाया राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहां तक कि बहुत से ऐसे महाविद्यालय हैं जिनमें शैक्षणिक सत्र 2011 /2013 ,2012/ 2014 दोनों की अनुदान राशि भी भेज दी गई है सिवान में उमाशंकर सिंह महाविद्यालय, जलालपुर और कुंवर महाविद्यालय आदमपुर ,गुलाब मेमोरियल कॉलेज बेतिया आदि संस्थानों में अनुदान की राशि भेजी जा चुकी है। जहां तक संबद्धता की बात थी उसे पुनः बहाल कर दी गई है ।अध्यक्ष द्वारा एप्लीकेशन शब्द हटाकर एप्लीकेशन डिलेट करके आवश्यक कागजात मांगा जा रहा है। इसी तरह की रणनीति व कूटनीति के शिकार नियोजित शिक्षक भी लगातार होते रहे हैं। नियोजित शिक्षकों के साथ तो इनका दोहरा व्यवहार थमने का नाम नहीं ले रहा है ।दुर्भाग्य है कि नियोजित शिक्षकों को अपनी प्रत्येक मांगों के लिए न्यायालय उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। प्रत्येक लाभ इन्हें सरकार से नहीं न्याय से ही मिला है और शायद आगे भी वहीं से मिले।विडंबना है कि एक तरफ माध्यमिक शिक्षक संघ दावा करता है अपने संघ की मजबूती का दूसरी तरफ उन्हीं के सर्वमान्य नेता विधान पार्षद जो वर्षों से पद को सुशोभित कर रहे हैं तथा निवेदन समिति के भी अध्यक्ष हैं ,फिर भी नियोजित शिक्षकों की लंबित मांग, अंतर जिला स्थानांतरण की मांग आज भी लंबित है। कम पैसे में दूरदराज के स्थानों पर महिला पुरुष शिक्षकों को अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है ।अपनी नौकरी को बचाना इन की विडंबना बन गई है। इसी तरह एस टी ई टी/टीईटी के साथ भेदभाव की नीति भी सरकार और वर्तमान नेता गण की सोची समझी चाल है ।ताकि वह फूट डालो राज करो की स्थिति का लाभ उठा सकें ।यदि ऐसा नहीं है तो पूर्व में नियोजित शिक्षकों को प्रोबेशन में वेतनमान का लाभ मिला जबकि 2012 के बाद एसटीइटी/लाभ से वंचित रखा गया है इधर 7563 /2017का एक केस उच्च न्यायालय में परिवर्तनकारी माध्यमिक शिक्षक उच्चतर माध्यमिक शिक्षक द्वारा किया गया है जिसकी अगली सुनवाई 24 अक्टूबर 2019 को है ।इसकी प्रतीक्षा में सारे नियोजित शिक्षक हैं। ईपीएफ का लाभ भी तो एक केस के माध्यम से न्यायालय के द्वारा मिला इसमें सरकार और वर्तमान विधान पार्षद का कोई योगदान नहीं है दुख की बात तो यह है कि नियोजित शिक्षकों को सरकार हर हाल में शिक्षक मानने को तैयार नहीं है ,परंतु उनसे अधिकतम कार्य लेकर उनके शोषण को तत्पर दिखती है ।यदि ऐसा नहीं तो आकस्मिक मृत्यु होने पर एक आम व्यक्ति को मुआवजा के नाम पर चार लाख और नियोजित शिक्षक को भी 400000 दिए जाने का क्यों प्रावधान है।