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बेतिया(प.चं.) :: नये साल के पहले दिन एमजेके कॉलेज में होगा संविधान के प्रस्तावना का पाठ, 8जनवरी को सीएए और एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ होगा भारत बंद
December 30, 2019 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

शहाबुद्दीन अहमद, बेतिया(प.चं.), बिहार। आज 30 दिसंबर 2019 को बेतिया नगर के हरवाटिका चौक स्थित सुकन्या विवाह भवन में प्रेस वार्ता करते हुए औपचारिक रूप से सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ शिक्षा -रोजगार और कॉलेज कैंपस में लोकतंत्र की बहली को लेकर संयुक्त अभियान की घोषणा किया। छात्र-युवा के नेतृत्व में यूथ इंडिया अगेंस्ट सीएए, एनआरसी, एवं एनीआर के खिलाफ नये साल का संकल्प संविधान बचाओं -देश बचाओं के तहत एक जनवरी को एमजेके कॉलेज सहित पुरे जिले में एक माह का संविधान के प्रस्तावना का प्रतिज्ञा लेने का कार्यक्रम कि घोषणा किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए इनौस के जिला संयोजक कामरेड फरहान ने बताया कि देश के विभिन्न यूनिवर्सिटी के कई छात्र संगठन लगातार इस सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। 50 से अधिक छात्र और युवा संगठन जिसमें छात्र यूनियन, सरकारी और निजी यूनिवर्सिटी के आईआईटी संस्थान के स्टूडेंट-यूथ मूवमेंट, राज्य विश्वविद्यालय, नागरिक समाज, और दूसरे लोग भारतीय संविधान को बचाने के लिए एकजुट होकर एक साथ आए हैं। प्रेस कान्फ्रेंस करके बताना चाहते हैं कि हम हर मुमकिन तरीके से सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ़ संयुक्त अभियान के लिए छात्र-युवा नेतृत्व मिलकर यूथ इंडिया अगेंस्ट सीएए, एनआरसी, एवं एनीआर मंच का गठन किया गया है। इस मंच से पुरे देश में आंदोलन जारी है, उनहोंने कहा कि सीएए न सिर्फ मुस्लिम विरोधी है, बल्कि सांप्रदायिक और बाँटने वाला भी है। जबकि अखिल भारतीय एनआरसी मुस्लिमों और भारत के गरीबों और वंचितों समेत करोड़ों लोगों को नागरिकता से बेदखल करके उनके नागरिक अधिकारों को छीन लेगी। यह हर समुदाय के गरीब और हाशिए के लोगों को अधिकारविहीन करके उन्हें असुरक्षा के रसातल में फेंक देगी और एनआरसी के पहले कदम के तौर पर केंद्रीय सरकार राष्ट्रीय पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) ला रही है। एनपीआर कोई सामान्य जनगणना भर नहीं है, ये नागरिकों को डाउटफुल या अवैध नागरिक घोषित करने की ओर बढ़ा पहला कदम है। इनौस के राज्य नेता सुरेन्द्र चौधरी ने कहा कि उत्‍तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ की सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए प्रत्‍येक लोकतांत्रिक आवाज एवं अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के विरुद्ध चौतरफा हमला बोल दिया है। अभी तक 20 से ज्‍यादा लोग पुलिस की हिंसा में मारे जा चुके हैं। यहां तक कि पुलिस थानों में नाबालिगों को यातनायें देने की चिंताजनक खबरें आ रही हैं। ऐसे वीडियो प्रमाण मिल रहे हैं जिनमें पुलिस मुस्लिमों को भद्दी साम्‍प्रदायिक गालियां और जान से मारने की धमकियां दे रही है, और उनके घरों में लूटपाट व तोड़फोड़ कर रही है। मुस्लिम समुदाय से बेगुनाहों को झूठे अपराधों में फंसाया जा रहा है।आइसा नेता इरफान ने कहा कि बेतहाशा बढ़ाई गई हाॅस्टल फीस के खिलाफ जेएनयू के छात्रों के आंदोलन ने शिक्षा के सवाल पर पूरे देश का राजनीतिक विमर्श बदल कर रख दिया है.. फीस वृद्धि वापसी से आगे बढ़कर इसने आज शिक्षा अधिकार आंदोलन का रूप ले लिया है। जेएनयू पर हमला भाजपा द्वारा गरीबों के अधिकारों पर जारी हमले की ही अगली कड़ी है। भाजपा द्वारा जेएनयू की जगह जिओ युनिवर्सिटी बनाने की कोशिशों ने उसका कारपोरेटपरस्त चेहरा उजागर कर दिया है। जाहिर है, आज देश के स्तर पर इसका विरोध हो रहा है। 8 जनवरी 2020 को शिक्षा अधिकार के साथ-साथ कॉलेज कैंपस में लोकतंत्र की बहाली, नागरिकता अधिकार को लेकर भारत बंद होगा जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों-नौजवानो भाग लेगें। इस मौके पर नूरेसुलतान, सुजीत मुखर्जी एआईएम आई एम नेता नबीउल हक, फरहान आदि।