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बेतिया(प.चं.) :: महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी को सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन द्वारा दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
November 20, 2019 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

शहाबुद्दीन अहमद, कुुशीनगर केसरी, बेतिया पश्चिम चंपारण, बिहार। विश्व के पहले मिसाइल मैन अमर शहीद टीपू सुल्तान एवं भितिहारवा में प्रथम बालिका विद्यालय की आधारशिला रखने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी को सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन द्वारा दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि!

आज दिनांक 20 नवंबर 2019 को सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में विश्व के प्रथम मिसाइलमैन अमर शहीद टीपू सुल्तान की 270 वी जन्मदिवस एवं भितिहारवा आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी द्वारा स्थापित प्रथम विद्यालय की 102 वर्ष पूर्ण होने पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया !जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, गांधीवादी चिंतको एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया! इस अवसर पर पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन ने विश्व के प्रथम मिसाइल मैन अमर शहीद टीपू सुल्तान, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ,कस्तूरबा गांधी एवं स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस विषय पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला !इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय पीस एंबेस्डर सह सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद ने कहां की आज ही के दिन विश्व के प्रथम मिसाइल मैन अमर शहीद टीपू सुल्तान का 20 नवंबर 1750 ई0 जन्म हुआ था !उनका सारा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित रहा ! पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अपनी पुस्तक विंग ऑफ द फायर में लिखते हैं कि 1963 में लंदन की साइंस म्यूजियम में उन्होंने टीपू सुल्तान द्वारा उपयोग की गई रॉकेट मिसाइलों को देखा था! अंग्रेज अमर शहीद टीपू सुल्तान की शहादत के बाद रॉकेट मिसाइलों के साथ टीपू सुल्तान द्वारा रचित वह ग्रंथ भी अपने साथ ले गए जिसमें रॉकेट मिसाइल एवं युद्ध के तकनीक का पूर्ण शोध ग्रंथ था! इस अवसर पर बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के शोधार्थी शाहनवाज अली एवं स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर नीरज गुप्ता ने कहा कि आज ही के दिन 20 नवंबर 1917 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी द्वारा भितिहारवा आश्रम में स्वच्छता एवं शिक्षा के लिए विद्यालय की स्थापना की गई थी !राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने शिक्षा एवं स्वच्छता के लिए विद्यालय खोला और कस्तूरबा बनी शिक्षिका !राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने चंपारण के किसानों एवं मजदूरों की दुर्दशा देखते हुए बालिका शिक्षा, स्वच्छता, छुआछूत, कुपोषण ,महामारी ,बाल विवाह जैसे अनेक सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति के लिए विद्यालय खोलने का निर्णय बेतिया ऐतिहासिक हजारीमल धर्मशाला में लिया था! गांव के लोगों से थोड़ी सी जमीन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मांगी !लेकिन बेलवा कोठी के अंग्रेज मैनेजर एसी एमन के डर से कोई भी किसान गांव में जमीन देने को तैयार न था! तब बापू के अनुरोध पर भितिहारवा के मठ के बाबा राम नारायण दास ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को विद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराई! 16 नवंबर 2017 को ऐतिहासिक हजारीमल धर्मशाला से भितिहारवा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी एवं स्वतंत्रता सेनानियों के साथ पहुंचते हैं !04 दिन के अंदर फूस का विद्यालय आरंभ कर दिया जाता है !12 वर्ष से कम 80 बच्चों का नामांकन होता है! इसी बीच फुस के बने विद्यालय की खबर अंग्रेज एसी एमन तक पहुंचती है! एसी एमन के लोगों द्वारा विद्यालय में आग लगा दी जाती है! राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिम्मत नहीं हारते हैं ! पु न: ईट के खपरैल मकान में विद्यालय किया जाता है !आज भी कस्तूरबा गांधी द्वारा संचालित जीवंत रूप में है कस्तूरबा गांधी द्वारा संचालित विद्यालय! कला संस्कृति विभाग बिहार सरकार द्वारा आश्रम एवं संग्रहालय का रूप दिया जा चुका है! इस अवसर पर श्री एजाज अहमद ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि बिहार समेत देश के सभी विद्यालय में विश्वविद्यालयों में गांधी विचार विभाग की स्थापना की जाए ताकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व कस्तूरबा गांधी की 150 जन्म शताब्दी पर नई पीढ़ी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी द्वारा चलाए गए सत्य अहिंसा एवं आपसी प्रेम को समझ सके !यही होगी सरकार द्वारा सच्ची श्रद्धांजलि!