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बेतिया(प.चं.) :: महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद चंद्र शेखर आजाद की कर्मभूमि 89 वी शहादत दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि
February 28, 2020 • aaditya prakash srivastava • सामान्य
 

शहाबुद्दीन अहमद, बेतिया(प.चं.), बिहार। महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद शहीद-ए-आजम चंद्रशेखर आजाद की 89 वी शहादत दिवस पर सत्याग्रह फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया ! इसमें सभी धर्मों के लोगों ने भाग लिया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन एवं वरिष्ठ पर्यावरणविद अमित कुमार लोहिया ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला! इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय पीस एंबेस्डर सह सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद (अधिवक्ता) ने कहा कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की बेतिया पश्चिम चंपारण कर्मभूमि रही है !काकोरी लूट के बाद देश में पड़ने वाले छापों के बीच बचते बचाते 1925 के अंत के दिनों में चंद्रशेखर आजाद बेतिया पहुंचे! क्रांतिकारी फणींद्र नाथ घोष एवं मीना बाजार के व्यवसायी क्रांतिकारियों ने बेतिया के जोड़ा इनार स्थित फणींद्र नाथ घोष के आवास के समीप चंद्रशेखर आजाद को ठहराया था। लगभग 01 महीने तक शिक्षक हरिवंश राय के घर 17 दिनों तक केदार मनी शुक्ल, कुछ दिन नन्हको सिंह एवं गुलाब सिंह गुलाली एवं बैरिया में मनमोहन बनर्जी ने अपने घर के समीप ठहराया था !2 दिनों तक बेतिया स्थित एक मंदिर में एवं राज स्कूल के हॉस्टल में छुप कर चंद्रशेखर आजाद ने राष्ट्रीय आंदोलन को दिशा प्रदान की थी। इस अवसर पर डॉ0 एजाज अहमद ने कहा कि सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन की रिसर्च टीम ने जुड़ा ईनार बेतिया स्थित उस घर को भी खोज निकाला है जहां पर फणींद्र नाथ घोष के साथ चंद्र शेखर आजाद ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा प्रदान करने के लिए अपने कुछ दिन बताए थे! इस अवसर पर बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग डॉ0 शाहनवाज अली स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर डॉ नीरज गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में ऐसे हजारों दास्तान हम अपने पुरखों एवं परिजनों से सुनते आए हैं! इन तथ्यों को इतिहास लेखन के माध्यम से कलमबद्ध करने की आवश्यकता है ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास को जान सके। साथ ही हजारों गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को वह सम्मान मिल सके जिसके वह हकदार हैं! इतिहास लेखन में जगह देकर सम्मानित करना यही होगी शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति समाज एवं सरकार की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि।