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बेतिया(प.चं.) :: इंटरनेट पर आसानी से मिलने वाली पोर्नोग्राफी पर लगे रोक : सुरैया शहाब
December 9, 2019 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

शहाबुद्दीन अहमद, कुशीनगर केसरी, बेतिया, बिहार। इन दिनों इंटरनेट पर सर्व सुलभ पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने की चर्चा पूरे देश में छिड़ गई है, राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से लेकर सुबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पोर्नोग्राफीग्र को प्रतिबंधित करने की वकालत कर चुके हैं ,बहस का विषय यह है कि इंटरनेट पर सहज उपलब्ध अश्लीलता और नग्नता, यंगिस्तान को उत्तेजक और विकृत मानसिकता का शिकार बनाता है ,और वे उत्तेजना में दुष्कर्म जैसे कृत्य के लिए आतुर होते हैं, सतही तौर पर इससे सहमत हुआ जा सकता है, लेकिन भारत में कुल इंटरनेट देखने में 70 फ़ीसदी हिस्सा सिर्फ और सिर्फ पोर्नोग्राफी देखने में खर्च किया जाता है।

भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के बाद पोर्नोग्राफी देखने में तीसरा बट सबसे बड़ा उपभोक्ता देश बन गया है ,इस इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत )की जिला इकाई की जिला अध्यक्ष ,सुरैया शाहाब ने सरकार से मांग की है कि इंटरनेट पर आसानी से मिलने वाली पोर्नोग्राफी पर रोक लगाई जाए ताकि बच्चे -बच्चियों के अंदर सेक्स के प्रति रुझान जो बढ़ता जा रहा है वह नियंत्रित किया जा सकेगा ,अगर इस पर नियंत्रण करने की दिशा में सरकार की ओर से या सामाजिक ओर से कार्रवाई नहीं होगी तो निर्भय जैसा कांड प्रतिदिन होता रहेगा और इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो पाएगी, इंटरनेट पर यह सुविधा आसानी से मोबाइल के माध्यम से भी मिल जा रही है जिससे कम उम्र के युवक-युवतियों को पोर्नोग्राफी के माध्यम से कई तरह की मानसिक, शारीरिक, आर्थिक शोषण भी हो रहा है, जिससे युवक-युवतियों में सेक्स के प्रति उत्तेजना जग रही है और इस तरह की घटनाएं करने पर मजबूर हो रहे हैं ,अगर सरकारी स्तर से इस पर नियंत्रण नहीं किया जाएगा तो भविष्य में इसका अंधकार ही नजर आएगा।
आजकल के नवयुवक-नव युवतियों में पठन-पाठन में मन नहीं लगा कर केवल मोबाइल के माध्यम से पोर्नोग्राफी पर ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रहे हैं जिसके कारण इस तरह की घटनाएं घट रही हैं जो समाज के लिए कलंक का जिम्मा बनता जा रहा है, समाज के हम सभी लोगों का यह जिम्मेदारी बनती है के नवयुवक -नव युवतियों को ऐसी मानसिकता से बचाया जाए और उन्हें मोबाइल की सेवा से अलग रखा जाए, क्योंकि पढ़ने वाले बच्चे -बच्चियों को मोबाइल की कोई आवश्यकता नहीं है, इसकी सारी जिम्मेवारी परिवार के माता- पिता की बनती है कि अपने बच्चे- बच्चियों को स्कूल और कॉलेज भेजने के पूर्व उनका मोबाइल ले ले ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके तथा बच्चों की मानसिकता पर बुरा प्रभाव नहीं पड़े।