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बेतिया(प.चं.) :: चौक-चौराहों व सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था तुरंत की जाए : सुरैया शाहब
December 18, 2019 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

शहाबुद्दीन अहमद, कुशीनगर केसरी, बेतिया(प.चं.), बिहार। इन दिनों शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण ठंडी पड़ने के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इस भीषण ठंडी में प्रशासन से में सुरैया साहब जिला अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ(भारत) मांग करती हूं कि सभी चौक- चौराहों, सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था तुरंत की जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके और इस भीषण ठंडी से निजात मिल सके अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो इस भीषण ठंडी में मरने वालों की संख्या पर नियंत्रण नहीं हो पाएगी।ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन से मैं, मानवाधिकार कार्यकर्ता मांग करती हूं कि यथाशीघ्र सभी चौक- चौराहों के अलावा ,ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस भीषण ठंडी को देखते हुए अलाव जलाने की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
इसके अलावा जाड़े में ठिठुर रहे गरीब, बेसहारा, वृद्धों, लाचार लोगों ,पुरुष और महिलाओं के बीच कंबल का वितरण किया जाए, ताकि पीड़ित जनता अपने आप को बचा सके,और मरने के कगार पर ना जाएं।
शहर के सभी सामाजिक संस्थानों, रेड क्रॉस बेतिया के अलावा अन्य संस्थानों से तथा जिला प्रशासन से जनहित में मांग करती हूं के कंबल का वितरण कर इन बेसहारा लोगों को ठंडक से बचाने का काम किया जाए। इस भीषण ठंडी में, अस्पताल, अनुमंडल कार्यालय परिसर, प्रखंड कार्यालय परिसर ,टेंपो स्टैंड ,बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, रैन बसेरा, सार्वजनिक स्थानों पर तेज हवा व ठंड से कांपते लोगों को राहत दिलाने के लिए अलाव जलाने व कंबल वितरण की मांग की जाती है। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी इस भीषण ठंडी में गरीबों और बेसहारों को सहारा देने के लिए अलाव जलाने और कंबल वितरण की व्यवस्था ,जिला प्रशासन से कराने की मांग करती हूं ताके तेज हवा व ठंड से कांपते लोगों को मुक्ति मिल सके।
स्थानीय जिला प्रशासन एवं सामाजिक संस्थानों से अलाव जलाने की प्रक्रिया व कंबल वितरण का कार्यक्रम तब होता है जब ठंडी खत्म होने लगती है और लोगों के मरने का सिलसिला जारी रहता है, ऐस कई विगत वर्षों से देखने को मिल रहा था ,इसी वजह कर अभी शुरुआती ठंड में ही अलाव जलाने एवं कंबल वितरण करने की मांग की जा रही है ताकि स- समय गरीब जनता को इस भीषण ठंडी से निजात मिल सके।