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बेतिया(प.चं.) :: भाकपा माले के 11वेंं जिला संमेलन के बाद किया गया संवाददाता सम्मेलन
December 14, 2019 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

शहाबुद्दीन अहमद, कुशीनगर केसरी, बेतिया, बिहार। सुकन्या विवाह भवन, हरिबाटिका में 14 दिसंबर 2019 को भाकपा माले का 11वेेंं जिला संमेलन के समाप्ती पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए माले के राज्य सचिव कामरेड कुणाल ने कहा कि सीएबी व एनआरसी के खिलाफ 19 दिसंबर को आयोजित देशव्यापी जनप्रतिवाद के तहत बिहार में उक्त दिवस को बिहार बंद किया जाएगा।19 दिसंबर का दिन स्वतंत्रता आंदोलन के महान नायकों और सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है के गायक रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और रोशन सिंह की शहादत दिवस भी है। इसी दिन अंग्रेजी हुकूमत ने इन तीन क्रांतिकारियों को क्रमशः गोरखपुर, फैजाबाद व नैनीजेल (इलाहाबाद) में फांसी के तख्तों पर लटका दिया था। इस ऐतिहासिक दिन को देशव्यापी प्रतिवाद को देखते हुए वाम दलों ने राष्ट्रीय जनता दल से 21 दिसंबर के बदले 19 दिसंबर को ही बिहार बंद करने की संयुक्त अपील की है। उक्त बातों को भाकपा माले राज्य कामरेड कुणाल ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधन करते हुए कहा।आगे उनहोंने ने कहा कि मोदी-अमित शाह सरकार का नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी पूरी तरह संविधान की मौलिक संरचना तथा आजादी के आंदोलन के संपूर्ण मूल्यबोध के खिलाफ है। आज पूरे देश में इसका तीखा प्रतिवाद हो रहा है। विगत कई दिनों से पूर्वोत्तर के राज्यों में आंदोलन जारी है। दुर्भाग्य यह कि आंदोलनकारियों को बर्बर मिलिट्री दमन का सामना करना पड़ रहा है। असम में अबतक कई लोगों की मौत हो चुकी है। वाम दलों ने मिलिट्री दमन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। पूर्वोत्तर के इलाके में कफ्र्यू की स्थिति बेहद चिंताजनक है। मोदी-शाह ने पूरे देश को धधकती ज्वाला में झोक दिया है।भाजपा द्वारा एनआरसी (नागरिकता का राष्ट्रीय रजिस्टर) योजना के कारण असम की जनता, खासकर गरीब, वंचित समुदाय व अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में भय-आतंक का माहौल बना। उसका नतीजा आज पूरा देश देख रहा है। नागरिकता सूची से 19 लाख 60 हजार लोगों को बाहर कर दिया गया, जिसमें करीब 13 लाख हिंदू समुदाय के गरीब लोग हैं। नागरिकता-विहीन लोगों को डिटेंशन कैंपों (यातना शिविरों) में बंद कर उन्हे सड़ाया-मारा जा रहा है। कैंपों में अभी तक 6 महीने के दुधमुहे बच्चे से लेकर वृद्ध तक कुल 29 निर्दोष नागरिक मारे जा चुके हैं। लेकिन इससे सबक लेने की बजाए सरकार उलटे एनआरसी को पूरे देश में थोप रही है। एनआरसी की ही अगली कड़ी में धार्मिक भेदभाव पर आधारित सीएबी लाया गया, जिसका सर्वाधिक शिकार देश के आम-अवाम और सभी जाति-समुदाय के गरीब व वंचित लोग होंगे। देश के करोड़ों नागरिकों को नागरिकता-विहीन करने की इस साजिश को नाकाम करना होगा। नागरिकता से ही हमारे सारे अधिकार बनते हैं। यह बेहद स्वागतयोग्य है कि इसके खिलाफ आंदोलन की आग पूरे देश में फैल रही है। माले नेताओं ने बिहार सहित पूरे देश में महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि बंद में इसे भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। विगत दिनों पटना के बीएन काॅलेज की एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार का विरोध कर रहे छात्र-छात्राओं पर बर्बर लाठीचार्ज व दमन की कड़ी निंदा की गई। बंद में बलात्कार की मानसिकता पर चोट करने के लिए वर्मा कमिटी की सिफारिशों को लागू करने का मुद्दा उठाया जाएगा। जल-जीवन-हरियाली योजना के नाम पर आज पूरे बिहार में लाखों दलित-गरीबों को उजाड़ने का नोटिस मिल गया है. यह बहुत ही अन्यायपूर्ण है। जिन ताकतों ने वास्तव में आहर-पोखर व अन्य स्थानों पर कब्जा कर रखा है, सरकार उनपर तो कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, लेकिन गरीबों को निशाना बना रही है। बंद में इसे भी मुद्दा बनाया जाएगा। भाकपा माले संविधान, राष्ट्र की एकता-अखण्डता और सत्ता संरक्षित बलात्कार संस्कृति के खिलाफ आंदोलन तेज करने का आह्वान करते हैं। संवाददाता सम्मेलन में भाकपा-माले केन्द्रीय कमीटी विरेन्द्र गुप्ता, राज्य कमीटी सदस्य बैजनाथ यादव, जिला कमिटी सदस्य सुनील कुमार राव, मुखतार मियां, राज्य कमिटी सदस्य सुनील कुमार यादव, इनौस के संयोजक सुरेन्द्र चौधरी, संजय यादव आदि उपस्थित रहे।