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बेतिया(प.चं.) :: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर भाकपा माले ने निकाला सांप्रदायिकता विरोधी मार्च
December 6, 2019 • aaditya prakash srivastava • राजनीति

शहाबुद्दीन अहमद, कुशीनगर केसरी, बेतिया, बिहार। भाकपा माले ने बेतिया में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसीं पर सांप्रदायिकता विरोधी मार्च निकाल किया सभा। मार्च रेलवे स्टेशन परिसर से निकल कर जिला समाहरणालय के पास धरना स्थल पर पहुँचा जहां सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के केन्द्रीय कमिटी सदस्य बिरेन्द्र गुप्ता ने कहा कि 6 दिसम्बर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस एक तरफ संविधान पर भी हमला था तो दूसरी तरफ फासीवादी ताकतों ने सचेत रूप से संविधान के रचयिता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के 6 दिसम्बर परिनिर्वाण दिवस पर बाबरी मस्जिद विध्वंस कर आंबेडकर पर भी हमला किया था। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के साथ सभा की सुरूआत हुआ। आगे कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंसकों तथा उसके बाद देश में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ चलाएं गए सांप्रदायिक हिंसा अभियान के तीन दशक गुजर जाने के बाद भी उसके अपराधीयों को अब तक सजा नहीं मिली है।

उनहोंने ने आगे कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैंसले में कहा है कि 1949 की रात्रि में मस्जिद के गुंबद के ठीक निचे रामलला की मूर्ती रखना अबैध था। 6 दिसम्बर 1992 को फासीवादियों द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस भी गैरकानूनी था। इतना ही नहीं भाजपा के कई बड़े नेता घोषणा करते रहे हैं कि हमने बाबरी मस्जिद को तोडा है। तब न्यायलय को मस्जिद विध्वंसकों को सजा देने में क्यों देरी हो रही हैं। क्यों चुप है? उन्होंने कहा कि मस्जिद विध्वंसक आज सत्ता में है और बडी़ तेजी से धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक भारत को एक हिंदू राष्ट्र में बदलने के एजेंडे पर बढ़ रहे हैं। इस फैसले से इन ताकतों का मान और भी बढ़ गया है। अब आगे ताजमहल, काशी, मथुरा से लेकर भारत की हर प्राचीन मस्जिद अथवा मुस्लिम इमारत को चकनाचूर कर मिट्टी में मिला देने का नारा दे रहे हैं।

माले नेता सुनील कुमार राव सभा को संबोधित करते कहा कि लोग लोगों द्वारा कहा जा रहा है कि लंबे समय का झगड़ा समाप्त हो गया है, इसलिए सबको सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करना चाहिए। क्या सच में सुप्रीम कोर्ट ने न्याय किया है? नहीं, बिल्कुल नहीं। उसका फैसला न केवल अंतर्विरोध से भरा है, बल्कि जिसकी लाठी उसकी भैंस की कहावत को सही अर्थो में चरितार्थ करता सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़ते समय ऐसा लगता है। फैसला पढ़तें समय ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट न्याय करने वाला वाला वाला न्याय करने वाला वाला वाला है, लेकिन नतीजा ठीक उल्टा निकलता है, लेकिन नतीजा ठीक उलटा निकलता हैं, यदि मस्जिद गिराना और वैधानिक था तो फिर ऐसे फैसला था तो फिर ऐसे फैसला तो फिर ऐसे फैसला कैसे दिया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि मस्जिद गिराना असंवैधानिक था, तो फिर ऐसा फैसला कैसे दिया जा सकता है? वही विध्वंसकों और देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और लोकतंत्र पर हमला करने वाली ताकतों की सजा पर वह चुप है, इसका सीधा मतलब है कि फासीवादी ताकतों ने जिन सामाजिक उद्देश्यों उद्देश्यों के साथ बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया था, सुप्रीम कोर्ट ने उस पर मुहर लगा दी है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साबित कर दिया है कि भाजपा ने आज देश के संपूर्ण संस्थाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है, तमाम लोकतंत्र पसंद नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई को लड़ना होगा, फासीवादी ताकतों को देश की न्यायप्रिया जनता निश्चित रूप से ही शिकायत से ही शिकायत देगी, देश के संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के पक्ष में मजबूती से अवाज़ा उठाने की जरूरत है है इसलिए आज बाबरी मस्जिद विध्वंस के दोषियों को सजा दिलाने के लिए संकल्प को दोहराने और साथ ही लगतार संप्रदायिक जहर उगलने वाली प्रज्ञा सिंह ठाकुर, साक्षी महराज जैसे भाजपा नेताओं की संसद सदस्यता खारिज करने की मांग को उठाना होगा। इस मौके पर भाकपा माले नेता संजय राम राम सीताराम राम, अच्छेलाल राम, रामप्रताप पासवान, खेत मजदूर सभा के नेता मुखतार मिया, इंकलाबी नौजवान सभा के नेता सुरेंद्र कुमार चौधरी,इसलाम अंसारी, भरत ठाकुर,योगेन्द्र यादव, हाकिम अंसारी,गुडू मिश्रा, जोखन मियां,ननदू मुखिया , भोज राम नजरें आलम आदि नेताओं में भी सभा को संबोधित किया।